दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई

Lyricist: Gulzaar
Singer: Jagjeet Singh

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे अहसान उतारता है कोई।

आईना दिख के तसल्ली हुई
हमको इस घर में जानता है कोई।

फक गया है सज़र पे फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई।

फिर नज़र में लहू के छींटे हैं
तुमको शायद मुग़ालता है कोई।

देर से गूँजते हैं सन्नाटे
जैसे हमको पुकारता है कोई।


मुग़ालता = Illusions
सज़र = Branch

8 Replies to “दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई”

  1. फक गया है सज़र पे फल शायद
    पक गया है सज़र पे फल शायद

  2. proof ki bahut galtia hain. bahut say lafz galat type hue haina jese…’aena dikh k.” ki jagh aena deakh k tasalli hue, ….. fuk gia hai shajar ki jagah …. puk gia hai … type hona tha plz inhe thik kr lea….. GULZAR SHAIB ki behtreen ghazal’s mea say hai yea ghazal, Thank’s.

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