दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है

Lyricist: Mirza Ghalib
Singer: Jagjeet Singh, Chitra Singh

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है?

हमको उनसे वफ़ा की है उम्मीद
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।

हम हैं मुश्ताक़ और वो बेज़ार
या इलाही ये माजरा क्या है।

जब कि तुझ बिन नहीं कोई मौजूद
फिर ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है।

जान तुम पर निसार करता हूँ
मैंने नहीं जानता दुआ क्या है।


मुश्ताक़ = Eager, Ardent
बेज़ार = Angry, Disgusted

16 Replies to “दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है”

  1. The ‘dil-e-naadaan’ should be changed to ‘dil-e-naadaa.N’ (with a chandrabindi). Also, ‘maazaraa’ should be changed to ‘maajaraa’ and ‘mauzuud’ to ‘maujuud’.
    I would suggest you listen to Talat Mahmood and Suraiya’s rendition of this song, tuned so beautifully by Ghulam Mohammed for the film ‘Mirza Ghalib’.

  2. i agree with you folks, but also listen to Mehdi Hassan’s rendition set to raag Sarang. It is top of the range, with due respect to Talat and Suraiya, Jagjit sadly wont fall into that cataegory

  3. Some more shers that belong to this ghazal:

    mai.n bhii muu.Nh me.n zabaan rakhataa huu.N
    kaash puuchho ki muddaa kyaa hai

    ye parii cheharaa log kaise hai.n
    Gamazaa-o-ishvaa-o-adaa kyaa hai

    shikan-e-zulf-e-ambarii kyo.n hai
    nigah-e-chashm-e-surmaa saa kyaa hai

    sabazaa-o-gul kahaa.N se aaye hai.n
    abr kyaa chiiz hai havaa kyaa hai

    haa.N bhalaa kar teraa bhalaa hogaa
    aur darvesh kii sadaa kyaa hai

    And finally the maqta…

    mai.n ne maanaa ki kuchh nahii.n ‘Ghalib’
    muft haath aaye to buraa kyaa hai

  4. I dont agree to people speaking against someone
    I agree if u like Talat and Suraiya ji but than again JAgjit Singh and others have made a position by there hardword and hence no one should speak against someone

    Everyone is best in there own way which probabaly we all are too small to understand. To critiise someone is very easy, try to appreciate wht they have acheived

    Please dont think it as a lecture
    a very small advise from a friend

  5. दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
    आख़िर इस दर्द की दवा क्या है

    हम हैं मुश्ताक़ और वो बेज़ार
    या इलाही ये माजरा क्या है

    मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ
    काश पूछो कि मुद्दआ क्या है

    जब कि तुझ बिन नहीं कोई मौजूद
    फिर ये हंगामा, ऐ ख़ुदा क्या है

    ये परी चेहरा लोग कैसे हैं
    ग़म्ज़ा-ओ-इश्वा-ओ-अदा क्या है

    शिकन-ए-ज़ुल्फ़-ए-अम्बरी क्यों है
    निगह-ए-चश्म-ए-सुरमा क्या है

    सब्ज़ा-ओ-गुल कहाँ से आये हैं
    अब्र क्या चीज़ है हवा क्या है

    हमको उनसे वफ़ा की है उम्मीद
    जो नहीं जानते वफ़ा क्या है

    हाँ भला कर तेरा भला होगा
    और दरवेश की सदा क्या है

    जान तुम पर निसार करता हूँ
    मैं नहीं जानता दुआ क्या है

    मैंने माना कि कुछ नहीं ‘ग़ालिब’
    मुफ़्त हाथ आये तो बुरा क्या है

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