ऐ हुस्न-ए-लाला फ़ाम ज़रा आँख तो मिला

Lyricist: Sagar Siddique
Singer: Ghulam Ali

ऐ हुस्न-ए-लाला फ़ाम ज़रा आँख तो मिला।
ख़ाली पड़े हैं जाम ज़रा आँख तो मिला।

कहते हैं आँखें आँख से मिलने है बंदगी
दुनिया के छोड़ काम ज़रा आँख तो मिला।

क्या वो ना आज आएँगे तारों के साथ-साथ
तनहाइयों की शाम ज़रा आँख तो मिला।

साक़ी मुझे भी चाहिए इक जाम-ए-आरज़ू
कितने लगेंगे दाम ज़रा आँख तो मिला।

हैं राह-ए-कहकशाँ में अज़ल से खड़े हुए
‘सागर’ तेरे ग़ुलाम ज़रा आँख तो मिला।


लाला = Flower
फ़ाम = Like, Resembling, Of the colour of, Approaching to the colour of
कहकशाँ = The milky-way, galaxy
अज़ल = Eternity without beginning, existence from eternity, beginning, source, origin

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