गर्दिश-ए-दौराँ का शिकवा था मगर इतना न था

Lyricist: Ashoor Kazmi (I am not sure of this name)
Singer: Ghulam Ali

गर्दिश-ए-दौराँ का शिकवा था मगर इतना न था
तुम न थे तब भी मैं तनहा था मगर इतना न था।

दोस्ती के नाम पर पहले भी खाए थे फ़रेब
दोस्तों ने दर्द बख़्शा था मगर इतना न था।

तुमसे पहले ज़िन्दग़ी बे-कैफ़ थी बेनाम थी
रास्तों में घुप अँधेरा था मगर इतना न था।

तुम मिले तो बढ़ गई कुछ और दिल की बेकली
सिलसिला था बे-यकीन का मगर इतना न था।

हर तरफ चर्चे हैं अब मेरे तुम्हारे नाम के
शहर में ‘आशूर’ रुसवा था मगर इतना न था।

7 Replies to “गर्दिश-ए-दौराँ का शिकवा था मगर इतना न था”

  1. aoa mr reza i heard rhe sad news regarding the sad demise of mr ashoor kazmi who is my fathers elder brother
    unfortunately in my entire life i didnt get a chance to meet him a single time as we live in pakistan and he was far away in the uk
    but i need u to do me a favour as can u give me his contact details as i want to give my condolance message to his sister ms shabana there in the uk
    ur responce will be highly appreciated
    regards

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