देख तो दिल कि जाँ से उठता है

Lyricist: Meer Taqi Meer
Singer: Mehdi Hasan

देख तो दिल कि जाँ से उठता है
ये धुआँ-सा कहाँ से उठता है।

गोर किस दिलजले की है ये फ़लक
शोला एक सुबह याँ उठता है।

बैठने कौन दे है फिर उसको
जो तेरे आसताँ से उठता है।

यूँ उठे आह उसगली से हम
जैसे कोई जहाँ से उठता है।


गोर = Tomb, Grave
फ़लक = Sky
याँ = यहाँ
आसताँ = Abode, Threshold

3 Replies to “देख तो दिल कि जाँ से उठता है”

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