खाकर ज़ख़्म दुआ दी हमने

Lyricist: Farhat Shahzad
Singer: Ghulam Ali

खाकर ज़ख़्म दुआ दी हमने
बस यूँ उम्र बिता दी हमने।

रात कुछ ऐसे दिल दुखता था
जैसे आस बुझा दी हमने।

सन्नाटे के शहर में तुझको
बे-आवाज़ सदा दी हमने।

होश जिसे कहती है दुनिया
वो दीवार गिरा दी हमने।

याद को तेरी टूट के चाहा
दिल को ख़ूब सज़ा दी हमने।

आ ‘शहज़ाद’ तुझे समझाएँ
क्यूँकर उम्र गँवा दी हमने।

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