दिल में और तो क्या रखा है

Lyricist: Nasir Kazmi
Singer: Ghulam Ali

दिल में और तो क्या रखा है
तेरा दर्द छुपा रखा है।

इतने दुखों की तेज़ हवा में
दिल का दीप जला रखा है।

इस नगरी के कुछ लोगों ने
दुख का नाम दवा रखा है।

वादा-ए-यार की बात न छेड़ो
ये धोखा भी खा रखा है।

भूल भी जाओ बीती बातें
इन बातों में क्या रखा है।

चुप चुप क्यों रहते हो ‘नासिर’
ये क्या रोग लगा रखा है।

One Reply to “दिल में और तो क्या रखा है”

  1. Wow this is the first time I’m reading this ghazal. The lyrics are copied in a hindi film song “aur is dil mein kya rakha hai.”
    I wish I can find this ghazal somewhere, never seen it in any ghulam ali cassettes I’ve encountered. If you have it can you somehow send it to me?

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