कह दो इस रात से कि रुक जाए

Lyrics: Noor Dewasi
Singer: Runa Laila

कह दो इस रात से कि रुक जाए दर्द-ए-दिल मिन्नतों से सोया है
ये वही दर्द जिसे ले कर लैला तड़पी थी मजनू रोया है।

मैं भी इस दर्द की पुजारिन हूँ ये न मिलता तो कब की मर जाती
इसके इक-इक हसीन मोती को रात-दिन पलकों में पिरोया है।

यो वही दर्द है जिसे ग़ालिब जज़्ब करते थे अपनी गज़लों में
मीर ने जब से इसको अपनाया दामन-ए-ज़ीस्त को भिगोया है।

सुरमई शाम के उजालों से

Lyrics:
Singer: Runa Laila

सुरमई शाम के उजालों से जब भी सज-धज के रात आती है
बेवफ़ा, बेरहम ओ बेदर्दी जाने क्यों तेरी याद आती है।

इस जवानी ने क्या सज़ा पाई, रेशमी सेज हाय तनहाई,
शोख़ जज़्बात ले हैं अँगड़ाई,आँखें बोझल हैं नींद हरजाई,
तेरी तस्वीर तेरी परछाईं दे के आवाज़ फिर बुलाती है।

आज भी लम्हे वो मोहब्बत के गर्म साँसों से लिपटे रहते हैं,
अब भी अरमान तेरी चाहत के महकी ज़ुल्फ़ों में सिमटे रहते हैं,
तुझको भूलें तो कैसे भूलें हम बस यही सोच अब सताती है।

वो भी क्या दिन थे जब कि हम दोनों मरने-जीने का वादा करते थे
जाम हो ज़हर का कि अमृत का साथ पीने का वादा करते थे।
ये भी क्या दिन हैं क्या क़यामत है ग़म तो ग़म है ख़ुशी भी खाती है।

चराग़-ओ-आफ़ताब ग़ुम

Lyrics: Sudarshan Faakir
Singer: Jagjeet Singh

चराग़-ओ-आफ़ताब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी
शबाब की नक़ाब गुम बड़ी हसीन रात थी।

मुझे पिला रहे थे वो कि ख़ुद ही शमाँ बुझ गई
गिलास ग़ुम,शराब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी।

लिखा था जिस किताब कि इश्क़ तो हराम है
हुई वही किताब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी।

लबों से लब जो मिल गए,लबों से लब ही सिल गए
सवाल ग़ुम जवाब ग़ुम बड़ी हसींन रीत थी।

वफ़ा का नाम ज़माने में आम कर जाऊँ

Lyrics:
Singer: Runa Laila

वफ़ा का नाम ज़माने में आम कर जाऊँ
फिर उसके बाद मैं ज़िंदा रहूँ कि मर जाऊँ।

इलाही मुझको अता कर सदाक़तों के चिराग़
मैं उनकी रोशनी लेकर नगर-नगर जाऊँ।

तेरी जमीं पे न हो नाम नफ़रतों का कहीं
मोहब्बतों के फ़साने सुनूँ जिधर जाऊँ।

मेरे वज़ूद ये भी तो एक मसरफ़ है
दिलों में प्यार की मानिंद मैं उतर जाऊँ।

मज़ा तो जब है कि दुश्मन भी मुझको याद करे
मिसाल प्यार की ऐसी मैं छोड़ कर जाऊँ।

अता कर = Give
सदाक़त = Truth
मसरफ़ = Outlay

जब प्यार नहीं है तो भुला क्यों नहीं देते

Lyrics: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers

जब प्यार नहीं है तो भुला क्यों नहीं देते?
ख़त किसलिए रखे हैं जला क्यों नहीं देते?

किस वास्ते लिखा है हथेली पे मेरा नाम
मैं हर्फ़ ग़लत हूँ तो मिटा क्यों नहीं देते?

लिल्लाह शब-ओ-रोज़ की उलझन से निकालो
तुम मेरे नहीं हो तो बता क्यों नहीं देते?

रह रह के न तड़पाओ ऐ बेदर्द मसीहा
हाथों से मुझे ज़हर पिला क्यों नहीं देते?

जब इसकी वफ़ाओं पे यकीं तुमको नहीं है
‘हसरत’ को निग़ाहों से गिरा क्यों नहीं देते?

हर्फ = Syllable, Letter
शब-ओ-रोज़ = Night and Day

वादियाँ-वादियाँ, रास्ते-रास्ते

Lyricist:
Singer: Runa Laila

वादियाँ-वादियाँ, रास्ते-रास्ते
मारे मारे फिरे हम तेरे वास्ते।

आबशारों से पूछा कहाँ हैं सनम
और नज़ारों के जा जा के पकड़े क़दम
इन बहारों ने फ़रमाया क्या जाने हम
खा रहा है हमें अब जुदाई का ग़म।
छाले पड़ते गए भागते-भागते।

मचली जाएँ लटें, लिपटी जाए हवा
जलता जाए बदन, रोती जाए वफ़ा
बेवफ़ा मत सता मिल भी जा आ भी जा
कि ख़ता क्या बता क्यों ये दे दी सज़ा।
आँखें पथरा गईं जागते-जागते।

इश्क जब एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है

Lyricist: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers

इश्क जब एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है
और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है।

अपने माथे पे ये बिंदिया की चमक रहने दो
ये सितारा मुझे मंज़िल के पता देता है।

ऐ नमकपाश तेरी साँवली सूरत की क़सम
दिल का हर ज़ख़्म तुझे दिल से दुआ देता है।

तू मुझे प्यार से देखे या न देखे ज़ालिम
तेरा अंदाज़ मोहब्बत का पता देता है।

मैं किसी ज़ाम का मोहताज नहीं हूँ ‘हसरत’
मेरा साकी मुझे आँखों से पिला देता है।

कह रहा है आपका हर शख़्स दीवाना हमें

Lyricist: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers

नूर-ए-अनवर से अँधेरे को मिटाया आपने
और क़िस्मत का सितारा जगमगाया आपने।
ख़ुशबू-ए-अफ़ज़ल ज़माना हमको कहता है मग़र
आज हम जो कुछ भी हैं हमको बनाया आपने।


कह रहा है आपका हर शख़्स दीवाना हमें
आप ही के नाम से दुनिया ने पहचाना हमें।

आपके दम से ही क़ायम है निज़ाम-ए-ज़िन्दग़ी
एक पल के वास्ते भी छोड़ न जाना हमें।

दोस्तों का प्यार, हसरत और फिर उसका करम
अहल-ए-फ़न अहल-ए-नज़र हर बज़्म ने जाना हमें।


नूर = Luminescence, Luster
अनवर = Light
अफ़ज़ल = Prime
निज़ाम = Arrangement, Establishment, Order, Organisation
अहल = One who is, Resident, Member
बज़्म = Gathering

नज़र मुझसे मिलाती हो

Lyricist: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers

नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा-सी जाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

जबाँ ख़ामोश है लेकिन निग़ाहें बात करती हैं
अदाएँ लाख भी रोको अदाएँ बात करती हैं।
नज़र नीची किए दाँतों में उँगली को दबाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

छुपाने से मेरी जानम कहीं क्या प्यार छुपता है
ये ऐसा मुश्क है ख़ुशबू हमेशा देता रहता है।
तुम को सब जानती हो फिर भी क्यों मुझको सताती हो?
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

तुम्हारी प्यार का ऐसे हमें इज़हार मिलता है
हमारा नाम सुनते ही तुम्हारा रंग खिलता है
और फिर साज़-ए-दिल पे तुम हमारे गीत गाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

तुम्हारे घर में जब आऊँ तो छुप जाती हो परदे में
मुझे जब देख ना पाओ तो घबराती हो परदे में
ख़ुद ही चिलमन उठा कर फिर इशारों से बुलाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

तू मेरे साथ न चल

Lyricist: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers

तू मेरे साथ न चल, ऐ मेरी रूह-ए-ग़ज़ल
लोग बदनाम न कर दें तू इरादों को बदल।

मैंने माना कि बहुत प्यार किया है तूने
साथ ही जीने का इकरार है तूने
मान ले बात मेरी देख तू इस राह न चल।

साथ देखेंगे तो फिर लोग कहेंगे क्या-क्या
सोच ले, सोच ले इलज़ाम धरेंगे क्या-क्या
ऐ मेरी परदा-नशीं देख न परदे से निकल।

अपनी उलफ़त पे कभी आँच न आ जाए कहीं
तेरी रुसवाई हो ये बात गँवारा ही नहीं।
देख नादान न बन, होश में आ, यूँ न मचल।