नज़र मुझसे मिलाती हो

Lyricist: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers

नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा-सी जाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

जबाँ ख़ामोश है लेकिन निग़ाहें बात करती हैं
अदाएँ लाख भी रोको अदाएँ बात करती हैं।
नज़र नीची किए दाँतों में उँगली को दबाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

छुपाने से मेरी जानम कहीं क्या प्यार छुपता है
ये ऐसा मुश्क है ख़ुशबू हमेशा देता रहता है।
तुम को सब जानती हो फिर भी क्यों मुझको सताती हो?
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

तुम्हारी प्यार का ऐसे हमें इज़हार मिलता है
हमारा नाम सुनते ही तुम्हारा रंग खिलता है
और फिर साज़-ए-दिल पे तुम हमारे गीत गाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

तुम्हारे घर में जब आऊँ तो छुप जाती हो परदे में
मुझे जब देख ना पाओ तो घबराती हो परदे में
ख़ुद ही चिलमन उठा कर फिर इशारों से बुलाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

35 Replies to “नज़र मुझसे मिलाती हो”

  1. I want to download this ghazal. Kindly make an acknowledgement about how to download this song.

    I will be grateful to you.

    Amol Nigam

  2. Today, I was searching this Ghazal to listen.well, sun to nahin paai padh jaroor li ab jab man hoga sunne ka khud hi ga liya karugi 🙂

  3. Can anyone download this song and post the link here.OR if u anyone knows the root to this song, it would be great.Thanks in advance.

  4. i have this ghazal sung by amazing singers duo , i love them, i hope that i would find any site from where i can download ghazals of these singers, amazing ghazal, wah bhai wah,

  5. Hi Jaya,

    In the secon stanza the third line is:

    तुम तो सब जानती हो फिर भी क्यों मुझको सताती हो।

    Please make the correctoin.
    Thanks

  6. You can even download videos from Youtube. There are lot of ways for doing this. Simplest are copy and paste my given link at these place.

  7. मैं हसरत जैपुरी साहब का बहुत शुक्रगुजार हू क्योंकि ये वह कलाम है जिसने मुझको पहचान दी है……………!!! मेरी अपनी कोई खास पहचान नहीं थी कबी मैंने ये ग़ज़ल सुनी और दिल को छु गयी जब से मेरे लबो पैर सिर्फ और सिर्फ यही ग़ज़ल रहने लगी मैं दिन हो या रात यही गुण गुनाया करता हू और इसी तरह मेरे साथ रहने वालो तक भाई यह ग़ज़ल पहुची तो सब यह कहने लगे की यह ग़ज़ल फिरोज भाई की ग़ज़ल है मैंने मना करता हू की भाई मेरे ग़ज़ल नहीं हसरत जैपुरी साहब ने लिखी है ये ग़ज़ल लेकिन मानते ही नहीं है कहते है की यह उम्दा कलम हमने आपसे सुना हे हम तो यही कहेगे की यह कलम आपका हा…………….. अब मैं क्या करू मानना पड़ता है इसकी ग़ज़ल वजह से मैं इंदौर और भोपाल मैं 500 से जयादा दोस्त बना चूका हू………… एक बार फिर से हसरत साहब का बहुत बहुत शुक्रिया अदा करना चाहता हू की उन्होने हमे इतना उम्दा कलाम दिया
    “उस्ताद अहमद हुस्सैन मुहम्मद हुस्सैन” साहब काभी सुक्रगुजार हू जो अपनी इतनी बेहतरीन
    आवाज़ मैं इसको सजाया है :अल्लाह: आपकी आवाज को सलामत रखे

    मुहम्मद फिरोज इलियास

  8. this is my fav.song(gazal) ever i like this song and it touched my soul i m thankful to singer who sung and compose this song..very nice work..keep doing well may god bless you….kunal malhotra..surajpur

  9. I love all ghazals of Hussain brothers, “mausam aayenge jayenge, hum tumko bhool na payenge” and musafir hai hum toh are my favourite

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