आए कुछ अब्र कुछ शराब आए

Lyrics: Faiz Ahmed Faiz
Singer: Mehdi Hasan

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
उसके बाद आए जो अज़ाब आए।

बाम-ए-मीना से माहताब तेरे
दस्त-ए-साकी में आफ़ताब आए।

कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बेहिसाब आए।

हर रग-ए-ख़ूँ में फिर चरागाँ हो
सामने फिर वो फिर बेनक़ाब आए।

‘फ़ैज़’ थी राह सर-बसर मंज़िल
हम जहाँ पहुँचे क़ामयाब आए।

अब्र = Cloud
अज़ाब = Agony, Anguish, Pain, Punishment
बाम = Terrace, Rooftop
मीना = Enamel
दस्त = Hands
सर-बसर = Wholly, Entirely

5 Replies to “आए कुछ अब्र कुछ शराब आए”

  1. युनिकोड देवनागरी में उर्दू शायरी में लिपिबद्ध कर आप बहुत बड़ा काम अंजाम दे रहे हैं. धन्यवाद.

    बामे-मीना से माहताब उतरे
    दस्ते साकी में आफताब आये
    वा! हमारा पसंदीदा शेर है.

    “सारे सुख़न हमारे” में एक छोटीसी कविता पढ़ी थी. इस संग्रह में समावेश हो सकता है.

    कवी की मां कहती है-

    उसने जब बोलना न सीखा था
    उसकी हर बात मैं समझती थी
    अब वो शायर बना है नामे-ख़ुदा
    लेकिन अफ़सोस के एक बात उसकी
    मेरे पल्ले ज़रा नहीं पड़ती

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