ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए

Lyrics: Tasleem Faazli
Singer: Mehdi Hasan

ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए
किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए।

कुछ इस तरह से जिए ज़िन्दग़ी बसर न हुई
तुम्हारे बाद किसी रात की सहर न हुई
सहर नज़र से मिले ज़ुल्फ़ ले के शाम आए।

ख़ुद अपने घर में वो मेहमान बन के आए हैं
सितम तो देखिए अनजान बन के आए हैं
हमारे दिल की तड़प आज कुछ तो काम आए।

वही है साज़ वही गीत है वही मंज़र
हर एक चीज़ वही है नहीं है तुम वो मगर
उसी तरह से निग़ाहें उठें, सलाम आए।

6 Replies to “ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए”

  1. a correction:
    kuchh is tarah ‘se’ jiye……

    ghazal?tradionally not,but an experimental form,proposed and employed by some urde poets incl gulzar;conforms to all requirements of a ghazal ,with an additional misra in each she’r.
    this one is included under mehdi hasan’s filmy ghazals.

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