तक़लीफ़-ए-हिज्र दे गई राहत कभी-कभी

Lyrics:
Singer: Abida Parveen

तक़लीफ़-ए-हिज्र दे गई राहत कभी-कभी
बदला है यों भी रंग-ए-मोहब्बत कभी-कभी।

दिल मे तेरी जफ़ा को सहारा समझ लिया
गुज़री है यों भी हम पे मुसीबत कभी-कभी।

दुनिया समझ न ले तेरे ग़म की नज़ाकतें
करता हूँ ज़ेर-ए-लब शिक़ायत कभी-कभी।

है जिस तरफ़ निग़ाह तवज्जो उधर नहीं
होती है बेरुख़ी भी इनायत कभी-कभी।

आई शब-ए-फिराक़ तो घबरा गए ‘शजी’
आती है ज़िन्दगी में क़यामत कभी-कभी।

Is शजी the name of the lyricist? Any idea?

ज़ेर = Defeated, Weak , Under
ज़ेर-ए-लब = Humming, In A Whisper, Undertone
तवज्जो = Attention
फिराक़   = Separation, Anxiety

7 Replies to “तक़लीफ़-ए-हिज्र दे गई राहत कभी-कभी”

  1. जया जी, यदि आप अपनी श्रेणियों को दुभाषी कर देंगी तो बहुत अच्छा रहेगा।
    उदाहरण के लिये “Ahmed Faraz।अहमद फ़राज”

    क्योंकि अंग्रेजी मे होने की वजह से नारद के टैगक्लाउड मे दिक्कत आ रही है। आपके संकलन का लेखा जोखा यहाँ भी देखें।

    http://akshargram.com/narad/author/jaya
    http://akshargram.com/narad/archives/

  2. जीतू जी, देरी के लिए माफ़ी चाहती हूँ। दरअसल, wordpress.com ने दो links होने की वजह से इसे moderation queue में डाल दिया था। अभी परीक्षाएँ चल रही हैं। इसके बाद मैं इन्हें ठीक करने की कोशिश करूँगी।

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