आँखों के इंतज़ार का दे कर हुनर चला गया

Lyrics: Hasan Kamaal
Singer: Asha Bhosle

आँखों के इंतज़ार का दे कर हुनर चला गया,
चाहा था एक शख़्स को जाने किधर चला गया।

दिन की वो महफिलें गईं, रातों के रतजगे गए
कोई समेट कर मेरे शाम-ओ-सहर चला गया।

झोंका है एक बहार का रंग-ए-ख़याल यार भी,
हर-सू बिखर-बिखर गई ख़ुशबू जिधर चला गया।

उसके ही दम से दिल में आज धूप भी चाँदनी भी है,
देके वो अपनी याद के शम्स-ओ-क़मर चला गया

कूचा-ब-कूचा दर-ब-दर कब से भटक रहा है दिल,
हमको भुला के राह वो अपनी डगर चला गया।

हर-सू = In all directions
शम्स-ओ-क़मर = Sun and Moon

2 Replies to “आँखों के इंतज़ार का दे कर हुनर चला गया”

  1. Suno,

    log puchtai to hogai tumse,

    tumsa koi nhe…

    Lbb khamosh huai hongai, dil kh rhah hoga…

    MUJHSA HE HAI WH ,

    jo khus to hoga apno ke mhfll me,

    pr tnhai me, mere he trh, ashk bhata hoga..!

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