बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया है मेरे आगे

Lyrics: Mirza Ghalib
Singer: Jagjit Singh

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया है मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे।

होता है निहाँ गर्द में सहरा मेरे होते
घिसता है जबीं ख़ाक पे दरिया मेरे आगे।

मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे
तू देख कि क्या रंग है तेरा मेरे आगे।

ईमान मुझे रोके है जो खींचे है मुझे कुफ़्र
काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे।

गो हाथ को जुम्बिश नहीं आँखों में तो दम है
रहने दो अभी सागर-ओ-मीना मेरे आगे।

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल = Children’s Playground
शब-ओ-रोज़ = Night and Day
निहाँ = निहान = Hidden, Buried, Latent
जबीं = जबीन = Brow, Forehead
कुफ़्र = Infidelity, Profanity, Impiety
कलीसा = Church
जुम्बिश = Movement, Vibration
सागर = Wine Goblet, Ocean, Wine-Glass, Wine-Cup
मीना = Wine Decanter, Container

5 Replies to “बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया है मेरे आगे”

  1. Wah bhai wah. Must appreciate the effort you have put in making urdu comprehensible:-

    Aapne urdu ko samjhaa ke kiya hai bahut hada ahsaan
    Pahli baar hame urdu shaayri samajhne me lagi aasaan

    Jaise kaanon ki gehreen sulakhiyon se bachaata hai Vakil
    Aaapne kar di aasaan urdu nazme jo lagti hai mushkil

    Waise tau hum bhi hai chote mote kavi
    Bahut khush hue dekh kar urdu shaayri ki ye chavi

    Aur log kya kehte hain uspe mat karna gaur
    Aap likhte chale jaaon, yeh dil maange more.

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