हर एक बात पे कहते हो

Lyrics: Mirza Ghalib
Singer: 1. Ghulam Ali 2. Jagjit Singh – Chaitra Singh

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है?
तुम ही कहो कि ये अंदाज़-ए-ग़ुफ़्तगू क्या है?

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है? (Jagjit Singh)
जो आँख ही से न टपके तो फिर लहू क्या है? (Ghulam Ali)

चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन
हमारी जेब को अब हाजत-ए-रफ़ू क्या है?

जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा,
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है?

रही ना ताक़त-ए-गुफ़्तार और हो भी
तो किस उम्मीद पे कहिए कि आरज़ू क्या है?

ग़ुफ़्तगू = Conversation
अंदाज़-ए-ग़ुफ़्तगू = Style of Conversation
पैराहन = Shirt, Robe, Clothe
हाजत-ए-रफ़ू = Need of mending (हाजत = Need)
गुफ़्तार = Conversation
ताक़त-ए-गुफ़्तार = Strength for Conversation

16 Replies to “हर एक बात पे कहते हो”

  1. Just a little comment on the use of Devnagri for converting the Urdu text. There are some letters in urdu which are not found in Hindi. An example:

    जब आँख ही से न टपका तो “फिर” लहू क्या है?

    “फिर” if prounced will be “Phir or Fir” but in urdu it is different. I am sure there is an accepted way of writing this letter in Devnagri If it remains uncorrected, then it will lead to wrong pronouncitation.
    Still I appreciate the effort to make the urdu poetry available in Devnagri script. It has its usefulness.
    thanks.
    masarrat

      1. Maine chaha tha kisi ko..mera haal kya hai dekho..jo kiya kasoor maine, wahi tum kabhi na karna…tumhe meri hi kasam hai, meri aarzoo na karna….

      2. अगर तेरी आरजू ना होती तो शायद मेरी ये हालत ना होती… चाहता तो बहुत हूँ कि भूल जाऊं तुझको लेकिन हर बात अपने बस मे नहीं होती ..

  2. teri har bazm mai, lakhon log aate honge a galib,
    magar us bazm ka chamkta hua sitara tu hai.
    galib ki gazlo mai ajeeb si tanhai hai.

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