कोई समझाए ये क्या रंग है मैख़ाने का

Lyrics: Allama Iqbal
Singer: Ghulam Ali

कोई समझाए ये क्या रंग है मैख़ाने का
आँख साकी की उठे नाम हो पैमाने का।

गर्मी-ए-शमा का अफ़साना सुनाने वालों
रक्स देखा नहीं तुमने अभी परवाने का।

चश्म-ए-साकी मुझे हर गाम पे याद आती है,
रास्ता भूल न जाऊँ कहीं मैख़ाने का।

अब तो हर शाम गुज़रती है उसी कूचे में
ये नतीजा हुआ ना से तेरे समझाने का।

मंज़िल-ए-ग़म से गुज़रना तो है आसाँ ‘इक़बाल’
इश्क है नाम ख़ुद अपने से गुज़र जाने का।

रक्स = Dance
चश्म = Eye
गाम = Step

5 Replies to “कोई समझाए ये क्या रंग है मैख़ाने का”

  1. “वालों” की जगह “वालो” लिखें।
    “ना से” की जगह “नासेह” लिखें।

    नासेह/नासह = Preacher, नसीहत करने वाला

  2. wah kya khoob kaha ‘manjil-a-gum se gujarana to hai aassan,Ishk hai naam khud apne se gujar jane ka.

    jindgi main her gum ko jhel jata hai insaan per ishk ke dariya ko paar kar jana to apne se gujar jane ka hi naam hai

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