पुकारती है ख़ामोशी

Lyrics: Dagh Dehalvi
Singer: Ghulam Ali

पुकारती है ख़ामोशी मेरी फुगाँ की तरह
निग़ाहें कहती हैं सब राज़-ए-दिल जबाँ की तरह।

जला के दाग़-ए-मोहब्बत ने दिल को ख़ाक किया
बहार आई मेरे बाग़ में खिज़ाँ की तरह।

तलाश-ए-यार में छोड़ी न सरज़मीं कोई,
हमारे पाँवों में चक्कर है आसमाँ की तरह।

छुड़ा दे कैद से ऐ कैद हम असीरों को
लगा दे आग चमन में भी आशियाँ की तरह।

हम अपने ज़ोफ़ के सदके बिठा दिया ऐसा
हिले ना दर से तेरे संग-ए-आसताँ की तरह।

फुगाँ = Cry of Distress
असीर = Prisoner
ज़ोफ़ = Weakness
संग = Stone
आसताँ = Threshold

3 Replies to “पुकारती है ख़ामोशी”

  1. teri pakiza nigaho ki kasam
    ab to teri sadgi se bhi se dar lagta hai.
    log ishq me fanaa hone ki bat karte hai.
    hame to jindgi se bhi dar lagta hai.

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