चराग़-ओ-आफ़ताब ग़ुम

Lyrics: Sudarshan Faakir
Singer: Jagjeet Singh

चराग़-ओ-आफ़ताब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी
शबाब की नक़ाब गुम बड़ी हसीन रात थी।

मुझे पिला रहे थे वो कि ख़ुद ही शमाँ बुझ गई
गिलास ग़ुम,शराब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी।

लिखा था जिस किताब कि इश्क़ तो हराम है
हुई वही किताब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी।

लबों से लब जो मिल गए,लबों से लब ही सिल गए
सवाल ग़ुम जवाब ग़ुम बड़ी हसींन रीत थी।