पुकारती है ख़ामोशी

Lyrics: Dagh Dehalvi
Singer: Ghulam Ali

पुकारती है ख़ामोशी मेरी फुगाँ की तरह
निग़ाहें कहती हैं सब राज़-ए-दिल जबाँ की तरह।

जला के दाग़-ए-मोहब्बत ने दिल को ख़ाक किया
बहार आई मेरे बाग़ में खिज़ाँ की तरह।

तलाश-ए-यार में छोड़ी न सरज़मीं कोई,
हमारे पाँवों में चक्कर है आसमाँ की तरह।

छुड़ा दे कैद से ऐ कैद हम असीरों को
लगा दे आग चमन में भी आशियाँ की तरह।

हम अपने ज़ोफ़ के सदके बिठा दिया ऐसा
हिले ना दर से तेरे संग-ए-आसताँ की तरह।

फुगाँ = Cry of Distress
असीर = Prisoner
ज़ोफ़ = Weakness
संग = Stone
आसताँ = Threshold

प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है

Lyrics: Hasti
Singer: Jagjit Singh

प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
नये परिन्दों को उड़ने में वक़्त तो लगता है।

जिस्म की बात नहीं थी उनके दिल तक जाना था,
लम्बी दूरी तय करने में वक़्त तो लगता है।

गाँठ अगर पड़ जाए तो फिर रिश्ते हों या डोरी,
लाख करें कोशिश खुलने में वक़्त तो लगता है।

हमने इलाज-ए-ज़ख़्म-ए-दिल तो ढूँढ़ लिया है,
गहरे ज़ख़्मों को भरने में वक़्त तो लगता है।

पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है

Lyrics: Meer Taqi Meer
Singer: Mehdi Hasan

पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है
जाने-ना-जाने गुल ही ना जाने, बाग तो सारा जाने है।

चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं
वरना दिलबर नादाँ भी इस दर्द का चारा जाने है।

महर-ओ-वफ़ा-ओ-लुत्फ़-ओ-इनायत एक से वाक़िफ़ इनमें नहीं
और तो सब कुछ तन्ज़-ओ-किनाया रम्ज़-ओ-इशारा जाने है।

महर = Affection
चारागरी = Healing of Wounds and Pain
तन्ज़ = Jest, Laugh, Quirk, Satire, Sarcasm
किनाया = Riddle
रम्ज़ = Secret, Mysterious