रक्स करती है फ़ज़ा वज्द में जाम आया है

Lyricist:
Singer: Ghulam Ali

रक्स करती है फ़ज़ा वज्द में जाम आया है।
फिर कोई ले के बहारों का पयाम आया है।

मैंने सीखा है ज़माने से मोहब्बत करना
तेरा पैग़ाम-ए-मोहब्बत मेरे काम आया है।

तेरी मंज़िल है बुलंद इतनी कि हर शाम-ओ-सहर
चाँद-सूरज से तेरे दर को सलाम आया है।

ख़ुद-ब-ख़ुद झुक गई पेशानी-ए-अरबाब-ए-ख़ुदी
इश्क की राह में ऐसा भी मकाम आया है।

जब कभी गर्दिश-ए-दौराँ ने सताया है बहुत
तेरे रिन्दों की ज़बाँ पर तेरा नाम आया है।


रक्स = Dance
वज्द= Rapture
पेशानी = Forehead
अरबाब = Friends
ख़ुदी = Self-Respect, Ego
रिन्द = Libertine, Blackguard

रफ़्ता-रफ़्ता वो मेरी हस्ती का सामाँ हो गए

Lyricist: Tasleem Fazli
Singer: Mehdi Hasan

रफ़्ता-रफ़्ता वो मेरी हस्ती का सामाँ हो गए
पहले जाँ, फिर जान-ए-जाँ, फिर जान-ए-जाना हो गए।

दिन-ब-दिन बढ़ती गईं, उस हुस्न की रानाइयाँ
पहले गुल, फिर गुलबदन, फिर गुलबदाना हो गए।

आप तो नज़दीक से, नज़दीकतर आते गए
पहले दिल, फिर दिलरुबा, फिर दिल के मेहमाँ हो गए।

प्यार जब हद से बढ़ा सारे तकल्लुफ़ मिट गए
आप से फिर तुम हुए, फिर तू का उनवाँ हो गए।

रानाई = Beauty
उनवाँ = Title

राज़ ये मुझपे आशकारा है

Lyricist: Sant Darshan Singh
Singer: Ghulam Ali

राज़ ये मुझपे आशकारा है
इश्क शबनम नहीं शरारा है।

इक निग़ाह-ए-करम फिर उसके बाद
उम्र भर का सितम गवारा है।

रक़्स में हैं जो सागर-ओ-मीना
किसकी नज़रों का ये इशारा है।

लौट आए हैं यार के दर से
वक़्त ने जब हमें पुकारा है।

अपने दर्शन पे इक निग़ाह-ए-करम
वो ग़म-ए-ज़िन्दग़ी का मारा है।

आशकारा = obvious
शरारा = spark
रक़्स = Dance