लुत्फ़ जो उसके इंतज़ार में है

लुत्फ़ जो उसके इंतज़ार में है
वो कहाँ मौसम-ए-बहार में है।

हुस्न जितना है गाहे-गाहे में
कब मुलाकात बार-बार में है।

जान-ओ-दिल से मैं हारता ही रहूँ
गर तेरी जीत मेंरी हार में है।

ज़िन्दगी भर की चाहतों का सिला
दिल में पैवस्त मू के ख़ार में है।

क्या हुआ गर खुशी नहीं बस में
मुसकुराना तो इख़्तियार में है।


पैवस्त = Absorb, Attach, Join
मू = Hair
ख़ार = A linen covering for a woman’s head, throat, and chin
इख़्तियार = Choice, Control, Influence, Option, Right

ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा

Lyricist: Dagh Dehalvi
Singer: Ghulam Ali

ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा
ऐसे आने से तो बेहतर था न आना तेरा।

तू जो ऐ ज़ुल्फ़ परेशान रहा करती है
किसके उजड़े हुए दिल में है ठिकाना तेरा।

अपनी आँखों में अभी कौंध गयी बिजली-सी
हम न समझे कि ये आना है कि जाना तेरा।

तू ख़ुदा तो नहीं ऐ नासिह नादाँ मेरा
क्या ख़ता की जो कहा मैंने ना माना तेरा।


नासिह = Advisor, Preacher