पुकारती है ख़ामोशी

Lyrics: Dagh Dehalvi
Singer: Ghulam Ali

पुकारती है ख़ामोशी मेरी फुगाँ की तरह
निग़ाहें कहती हैं सब राज़-ए-दिल जबाँ की तरह।

जला के दाग़-ए-मोहब्बत ने दिल को ख़ाक किया
बहार आई मेरे बाग़ में खिज़ाँ की तरह।

तलाश-ए-यार में छोड़ी न सरज़मीं कोई,
हमारे पाँवों में चक्कर है आसमाँ की तरह।

छुड़ा दे कैद से ऐ कैद हम असीरों को
लगा दे आग चमन में भी आशियाँ की तरह।

हम अपने ज़ोफ़ के सदके बिठा दिया ऐसा
हिले ना दर से तेरे संग-ए-आसताँ की तरह।

फुगाँ = Cry of Distress
असीर = Prisoner
ज़ोफ़ = Weakness
संग = Stone
आसताँ = Threshold

ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा

Lyricist: Dagh Dehalvi
Singer: Ghulam Ali

ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा
ऐसे आने से तो बेहतर था न आना तेरा।

तू जो ऐ ज़ुल्फ़ परेशान रहा करती है
किसके उजड़े हुए दिल में है ठिकाना तेरा।

अपनी आँखों में अभी कौंध गयी बिजली-सी
हम न समझे कि ये आना है कि जाना तेरा।

तू ख़ुदा तो नहीं ऐ नासिह नादाँ मेरा
क्या ख़ता की जो कहा मैंने ना माना तेरा।


नासिह = Advisor, Preacher