कह दो इस रात से कि रुक जाए

Lyrics: Noor Dewasi
Singer: Runa Laila

कह दो इस रात से कि रुक जाए दर्द-ए-दिल मिन्नतों से सोया है
ये वही दर्द जिसे ले कर लैला तड़पी थी मजनू रोया है।

मैं भी इस दर्द की पुजारिन हूँ ये न मिलता तो कब की मर जाती
इसके इक-इक हसीन मोती को रात-दिन पलकों में पिरोया है।

यो वही दर्द है जिसे ग़ालिब जज़्ब करते थे अपनी गज़लों में
मीर ने जब से इसको अपनाया दामन-ए-ज़ीस्त को भिगोया है।