तुझे क्या ख़बर मेरे हमसफ़र, मेरा मरहला कोई और है

Lyricist: Sant Darshan Singh
Singer: Ghulam Ali

तुझे क्या ख़बर मेरे हमसफ़र, मेरा मरहला कोई और है।
मुझे मंज़िलों से गुरेज़ है मेरा रास्ता कोई और है।

मेरी चाहतों को न पूछिए, जो मिला तलब के सिवा मिला
मेरी दास्ताँ ही अजीब है, मेरा मसला कोई और है।

वो रहीम है, वो करीम है, वो नहीं कि ज़ुल्म सदा करे
है यक़ीं ज़माने को देखकर कि यहाँ ख़ुदा कोई और है।

मैं चला कहाँ से ख़बर नहीं, इस सफ़र में है मेरी ज़िन्दगी
मेरी इब्तदा कहीं और है मेरी इंतहा कोई और है।

मेरा नाम ‘दर्शन’ है खतन, मेरे दिल में है कोई लौ पिघन
मैं हूँ गुम किसी की तलाश में मुझे ढूँढता और है।

Could not hear clearly the words in bold (of the last stanza). And hence, in all probability, they are written wrong. Corrections?


मरहला = Journey
गुरेज़ = Escape, Evasion
मसला = Problem
इब्तदा = Beginning
इंतहा = Ending

मेरा जज़्ब-ए-मोहब्बत कम न होगा

Lyricist: Sant Darshan Singh
Singer: Ghulam Ali

मेरा जज़्ब-ए-मोहब्बत कम न होगा
जहान-ए-आरज़ू बरहम न होगा।

बढ़ेगा मेरी दुनिया में उजाला
चिराग-ए-सोज़-ए-ग़म मद्धम न होगा।

जहाँ में आब गिल से मावरा भी
तेरा दर्द-ए-मोहब्बत कम न होगा।

तेरे दर पर जो सर ख़म हो गया है
वो अब दुनिया के आगे ख़म न होगा।

लड़ूँगा गर्दिश-ए-दौराँ से ‘दर्शन’
में जोश-ए-अमल अब कम न होगा।

Okay – so now the word meanings are all correct. Only undeciphered part is the meaning of the line in bold.

बरहम = Spoiled
सोज़ = Burning, Exciting, Passionate
आब = Brilliance, Brightness
गिल = Earth, Mud
मावरा = Extra
ख़म = Bend
गर्दिश = Misfortune
दौराँ = Time

अल्लाह, अल्लाह, लुत्फ क्या साकी के मैख़ाने में है

Lyricist: Sant Darshan Singh
Singer: Ghulam Ali

अल्लाह, अल्लाह, लुत्फ क्या साकी के मैख़ाने में है
जलवागरी राग-ए-दो-आलम उसके पैमाने में है।

दैर में क्या जुस्तजू है, क्या है काबे में तलाश
चश्म-ए-बा-तिन खोल वो दिल के सनमखाने में है।

कौन जाने क्या तमाशा है कि हादी के बग़ैर
इक हुजूम-ए-नगमदीर दिल के दवाखाने में है।

बैठै-बैठै ख़ुद मुझे होता है अक्सर ये गुमाँ
नगमगर मुतरिब कोई दिल के तलबखाने में है।

जिन्दगी मे तुझको ‘दर्शन’ मिल नहीं सकता कहीं
वो सुरूर-ए-कैफ़ जो मुज़्जत के खुमखाने मे है।


जलवागरी = Manifestation
राग = Melody
दो-आलम = Two Worlds
दैर = Temple
जुस्तजू = Desire, Search, Inquiry
चश्म = Eye
बा-तिन = Conscience
हादी = Instruments
मुतरिब = Singer
सुरूर = Joy, Pleasure, Rapture
कैफ़ = Happiness
खुम = Wine

जब कभी साकी-ए-मदहोश की याद आती है

Lyricist: Sant Darshan Singh
Singer: Ghulam Ali

जब कभी साकी-ए-मदहोश की याद आती है
नशा बन कर मेरी रग-रग में समा जाती है।

डर ये है टूट ना जाए कहीं मेरी तौबा
चार जानिब से घटा घिर के चली आती है।

जब कभी ज़ीस्त पे और आप पे जाती है नज़र
याद गुज़रे हुए ख़ैय्याम की आ जाती है।

मुसकुराती है कली, फूल हँसे पड़ते हैं
मेरे महबूब का पैग़ाम सबा लाती है।

दूर के ढोल तो होते हैं सुहाने ‘दर्शन’
दूर से कितनी हसीन बर्क़ नज़र आती है।

जानिब = In the direction
ज़ीस्त = Life
सबा = Breeze
बर्क़ = Lightning

ये किसने कह दिया आख़िर कि छिप-छिपा के पिओ

Lyricist: Sant Darshan Singht
Singer: Ghulam Ali

ये किसने कह दिया आख़िर कि छिप-छिपा के पिओ
ये मय है मय, इसे औरों को भी पिला के पिओ।

ग़म-ए-जहाँ को ग़म-ए-ज़ीस्त को भुला के पिओ
हसीन गीत मोहब्बत के गुनगुना के पिओ।

ग़म-ए-हयात का दरमाँ हैं इश्क के आँसू
अँधेरी रात है यारों दिए जला के पियो।

नसीब होगी बारह कैफ़ मर्ज़ी-ए-साकी
मिले जो ज़हर भी यारों तो मुसकुरा के पिओ।

मेरे ख़ुलूस पे शैख़-ए-हरम भी कह उठा
जो पी रहे हो तो ‘दर्शन’ हरम में आ के पिओ।


मय =Wine
ज़ीस्त =Life
दरमाँ = Medicine, Cure
कैफ़ = Intoxication, Happiness
बारह = Turn, Time
ख़ुलूस = Openness
शैख़ = Elder, Preacher

राज़ ये मुझपे आशकारा है

Lyricist: Sant Darshan Singh
Singer: Ghulam Ali

राज़ ये मुझपे आशकारा है
इश्क शबनम नहीं शरारा है।

इक निग़ाह-ए-करम फिर उसके बाद
उम्र भर का सितम गवारा है।

रक़्स में हैं जो सागर-ओ-मीना
किसकी नज़रों का ये इशारा है।

लौट आए हैं यार के दर से
वक़्त ने जब हमें पुकारा है।

अपने दर्शन पे इक निग़ाह-ए-करम
वो ग़म-ए-ज़िन्दग़ी का मारा है।

आशकारा = obvious
शरारा = spark
रक़्स = Dance

आज दिल से दुआ करे कोई

Lyricist: Sant Darshan Singh
Singer: Ghulam Ali

आज दिल से दुआ करे कोई
हक़-ए-उलफ़त अदा करे कोई।

जिस तरह दिल मेरा तड़पता है
यूँ न तड़पे ख़ुदा करे कोई।

जान-ओ-दिल हमने कर दिए कुरबान
वो न माने तो क्या करे कोई।

मस्त नज़रों से ख़ुद मेरा साकी
फिर पिलाए पिया करे कोई।

शौक-ए-दीदार दिल में है ‘दर्शन’
आ भी जाए ख़ुदा करे कोई।