दिल तड़पता है इक ज़माने से

Lyricist:
Singer: Mehdi Hasan

दिल तड़पता है इक ज़माने से
आ भी जाओ किसी बहाने से।

बन गए दोस्त भी मेरे दुश्मन
इक तुम्हारे क़रीब आने से।

जब कि अपना तुम्हें बना ही लिया
कौन डरता है फिर ज़माने से।

तुम भी दुनिया से दुश्मनी ले लो
दोनों मिल जाएँ इस बहाने से।

चाहे सारा जहान मिट जाए
इश्क मिटता नहीं मिटाने से।

बरसात की बहार है साक़ी शराब ला

Lyricist:
Singer: Munni Begam

बरसात की बहार है साक़ी शराब ला
ये रुत ही ख़ुशगवार है साक़ी शराब ला।

बाँगों में झूलती है हँसी किस अदा के साथ
इक-इक से हम-किनार है साक़ी शराब ला।

है साज़ भी छिड़ा हुआ मैकश भी जमा है
अब किसका इंतज़ार है साक़ी शराब ला।

गरमा रही हैं दिल को उमंगे शबाब की
हर मस्त बेकरार है साक़ी शराब ला।

क्या भूरी-भूरी छाई है मैख़ाने पर घटा
कैसी हसीं फुहार है साक़ी शराब ला।

हम-किनार = Embracing
मैकश = Boozer

गर्दिश-ए-दौराँ का शिकवा था मगर इतना न था

Lyricist: Ashoor Kazmi (I am not sure of this name)
Singer: Ghulam Ali

गर्दिश-ए-दौराँ का शिकवा था मगर इतना न था
तुम न थे तब भी मैं तनहा था मगर इतना न था।

दोस्ती के नाम पर पहले भी खाए थे फ़रेब
दोस्तों ने दर्द बख़्शा था मगर इतना न था।

तुमसे पहले ज़िन्दग़ी बे-कैफ़ थी बेनाम थी
रास्तों में घुप अँधेरा था मगर इतना न था।

तुम मिले तो बढ़ गई कुछ और दिल की बेकली
सिलसिला था बे-यकीन का मगर इतना न था।

हर तरफ चर्चे हैं अब मेरे तुम्हारे नाम के
शहर में ‘आशूर’ रुसवा था मगर इतना न था।

इक बार चले आओ

Lyricist:
Singer: Mehdi Hasan

फिर आ के चले जाना,फिर आ के चले जाना
इक बार चले आओ, सूरत तो दिखा जाओ।

तुमको मेरे गीतों का संगीत बुलाता है
कुछ गीत मेरे सुन लो, कुछ अपनी सुना जाओ।

जो तुमको बुलाएँ फिर तुम शौक से मत आना
किस बात पे रूठे इतना तो बता जाओ।

क्या दिल के तड़पने का अहसास नहीं तुमको
अब जान पर बन आई, लील्लाह चले आओ।

निशाँ भी कोई न छोड़ा

Lyricist:
Singer: Ghulam Ali

निशाँ भी कोई न छोड़ा कि दिल को समझाएँ
तेरी तलाश में जाएँ तो हम कहाँ जाएँ।

ओ जाने वाले ये दिल बदगुमाँ भी नहीं
लगी है आग नशेमन में और धुआँ भी नहीं।
यही नसीब में लिखा था घुट के मर जाएँ।

सुनाएँ राय किसे जब वो राज़दाँ न मिला
खुशी मिली बहारों का वो समाँ न मिला
यही थी एक तमन्ना कि तुझको अपनाएँ।

उजड़ गई है तमन्नाएँ तेरे जाने से
दिया ख़ुदा से करे या करे ज़माने से
ग़म-ए-जुदाई बता आज किससे टकराएँ।

I am not sure I have heard words राय and दिया correctly. Confirmations/Corrections?


बदगुमाँ = Jealous

बाद मुद्दत उन्हे देखकर यूँ लगा

Lyricist:
Singer: Jagjit Singh, Chitra Singh

बाद मुद्दत उन्हे देखकर यूँ लगा
जैसे बेताब दिल को करार आ गया।
आरजुओं के गुल मुसकुराने लगे
जैसे गुलशन में जान-ए-बहार आ गया।

तश्ना नज़रें मिलीं शोख़ नज़रों से जब
मय बरसने लगी जाम भरने लगा।
साक़िया आज तेरी ज़रूरत नहीं
बिन पिए, बिन पिलाए ख़ुमार आ गया।

रात सोने लगी सुबह होने लगी
शमाँ बुझने लगी दिल मचलने लगे
वक़्त की रोशनी में नहाई हुई
ज़िन्दगी पे अजब सा निखार आ गया।


तश्ना = Thirsty

रक्स करती है फ़ज़ा वज्द में जाम आया है

Lyricist:
Singer: Ghulam Ali

रक्स करती है फ़ज़ा वज्द में जाम आया है।
फिर कोई ले के बहारों का पयाम आया है।

मैंने सीखा है ज़माने से मोहब्बत करना
तेरा पैग़ाम-ए-मोहब्बत मेरे काम आया है।

तेरी मंज़िल है बुलंद इतनी कि हर शाम-ओ-सहर
चाँद-सूरज से तेरे दर को सलाम आया है।

ख़ुद-ब-ख़ुद झुक गई पेशानी-ए-अरबाब-ए-ख़ुदी
इश्क की राह में ऐसा भी मकाम आया है।

जब कभी गर्दिश-ए-दौराँ ने सताया है बहुत
तेरे रिन्दों की ज़बाँ पर तेरा नाम आया है।


रक्स = Dance
वज्द= Rapture
पेशानी = Forehead
अरबाब = Friends
ख़ुदी = Self-Respect, Ego
रिन्द = Libertine, Blackguard